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काँग्रेस के आलाकमान बिहार काँग्रेस इकाई से नाराज,मदन मोहन झा समेत सभी बरिष्ठ काँग्रेसी दिल्ली तलब। | दरभंगा में गोपालजी ठाकुर बनाम सिद्दीकी,मधुबनी में अशोक यादव बनाम फातमी और झंझारपुर में रामप्रीत मंडल बनाम गुलाब यादव में मुकाबला तय। | राहुल गांधी के कड़े रुख पर बदल रही है महागठबंधन में सीटों का ताल मेल,कीर्ति के लिये दरभंगा या मधुबनी से संभावना बंकी। | दरभंगा की राजनीति में एक युग का हुआ अंत,कीर्ति और फातमी युग अंत के तरफ,संजय झा हासिये पर। | महागठबंधन रह गया बरकरार, काँग्रेस 9 और राजद 20 सीटों पर लड़ेगी चुनाव,दरभंगा कांग्रेस के खाते में। | महागठबंधन टूट के कगार पर,कीर्ति आजाद का दरभंगा से कट सकता है टिकट,सिद्दीकी या मुकेश सहनी उतर सकते मैदान में। | दरभंगा सीट पर एनडीए से कौन मारेगा बाजी:संजय झा,गोपालजी ठाकुर या फिर नीतीश मिश्रा,रस्साकस्सी जारी,फैसला आज शाम तक संभावित। | धुंआ और राख में तब्दील हुआ दरभंगा का झगरुआ गाँव, भीषण अग्नि कांड के भेंट चढ़ा 57 घर,जिंदा जला मासूम। | दरभंगा संसदीय सीट काँग्रेस के खाते में,संजय झा बनाम कीर्ति झा आजाद के बीच मुकाबला। | अब दरभंगा समाहरणालय के दीवारों पर दिखेगी मधुबनी पेंटिग |

मधुबनी संसदीय सीट पर संभावित मुकाबला भाजपा के नीतीश मिश्रा और राजद के अली अशरफ फातमी के बीच।

मधुबनी संसदीय सीट पर संभावित मुकाबला भाजपा के नीतीश मिश्रा और राजद के अली अशरफ फातमी के बीच।

 

टाइम्स ऑफ मिथिला न्यूज़,मधुबनी।दरभंगा प्रमंडल का एक प्रमुख जिला है मधुबनी। मिथिलांचल का गढ़ मधुबनी को मिथिला संस्कृति का केंद्र माना जाता है और मिथिला पेंटिंग इसकी प्रमुख पहचान ।राजनीतिक रूप से भी मधुबनी की एक खास पहचान रही है।वर्तमान में हुक्मदेव नारायण यादव यहा के सांसद है जिन्होंने साल 2014  में राजद के दिगज्ज नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी को चुनावी समर में मात देकर यह सीट हासिल की थी।मधुबनी लोकसभा सीट में हरलाखी,बेनीपट्टी,बिस्फी, मधुबनी विधानसभा क्षेत्र और दरभंगा जिले के केवटी और जाले विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। वर्ष 2011 में हुए जनगणना के मुताबिक मधुबनी जिले की जनसंख्या 44,76,044 थी।मधुबनी संसदीय क्षेत्र में वोटरों की कुल संख्या 1,397,256 है. इसमें 755,812 पुरुष वोटर हैं जबकि 641,444 महिला वोटर हैं।
 
क्या है इस सीट का राजनीतिक इतिहास
मधुबनी लोकसभा सीट से 1957 में कांग्रेस के श्याम नारायण मिश्रा ने जीत दर्ज किया था।1962 में भी कांग्रेस ही यहा से जीती। 1967 और 1971 के चुनावों में यहां पर CPI का कब्जा रहा। 1977 में इस सीट से जनता पार्टी ने जीत हासिल की। 1980 में यहां कांग्रेस के सफीकुल्लाह अंसारी सांसद बने पर उनके निधन के बाद इस सीट पर उपचुनाव हुआ था जिसमें CPI ने पुनः बाजी मार ली। 1989, 1991 और 1996 में यहां सीपीआई का ही राज रहा लेकिन 1998 के चुनाव में कांग्रेस नेता शकील अहमद ने जीत दर्ज कर सीपीआई के आधिपत्य को यहा खत्म कर दिया। साल 1999 में भाजपा के हुक्मदेव नारायण यादव यहां से पहली बार सांसद चुने गए।साल 2004 के चुनाव में उन्हें कांग्रेस के हाथों शिकस्त मिली लेकिन साल 2009 और 2014 में यह सीट उन्हीं के कब्जे में रहा।पर हुक्मदेव नारायण यादव के चुनावी राजनीति से सन्यास की घोषणा के बाद अबकी बार भाजपा में इस सीट के लिये नए चेहरे की तलाश की जा रही है जो हुक्मदेव नारायण यादव की इस विरासत को संभाल सके।
 
नीतीश मिश्रा बन सकते है एनडीए के उम्मीदवार
लोकसभा चुनाव 2019 को लेकर मधुबनी में सरगर्मी तेज हो गई है । वर्तमान सांसद हुक्मदेव नारायण यादव के अब चुनाव नही लड़ने के घोषणा के बाद एनडीए में इस सीट को लेकर काफी सोच विचार चल रही है।हालांकि कयासों में इस सीट को लेकर कई नाम उभर कर सामने आ रहा है जिसमें हुक्मदेव नारायण यादव के पुत्र और केवटी विधानसभा से पूर्व विधायक रहे अशोक यादव,मधुबनी से वर्तमान विधान पार्षद सुमन महासेठ समेत कई नेता भाजपा से मधुबनी लोकसभा सीट पर अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं पर  विश्वस्त सूत्रों के हवाले से जो खबरें आ रही है उसके मुताबिक इस सीट के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कैबिनेट में पूर्व में मंत्री रहे चुके भाजपा के नेता नीतीश मिश्रा की उम्मीदवारी लगभग तय मानी जा रही है।बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा के पुत्र और झंझारपुर विधानसभा से विधायक रहे चुके नीतीश मिश्रा एक साफ सुथरी छवि के नेता रहे है।उनके परिवार का एक राजनीतिक विरासत रहा है और उस विरासत का गढ़ मधुबनी ही रहा है।ऐसी स्थिति में यह माना जा रहा है कि भाजपा को उन पर दांव लगाने में कोई परहेज और परेशानी नही होनी चाहिये।जदयू में भी काफी अर्से रह चुके नीतीश मिश्रा गठबंधन के लिये एक सही विकल्प के रूप में उभर कर सामने आ रहे है।
 
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महागठबंधन से फातमी है आगे
महागठबंधन में एकबार फिर मधुबनी सीट राजद के खाते में जाती दिख रही है।दरभंगा सीट पर कांग्रेस के तरफ से कीर्ति झा आजाद या विकासशील इंसान पार्टी के मुकेश सहनी को टिकट मिलने की प्रबल संभावना है।दूसरी ओर मधुबनी से सांसद रह चुके शकील अहमद के लिये काँग्रेस में ही कोई उत्साह नही दिख रहा है।ऐसी स्थिति में दरभंगा से राजद के कद्दावर नेता और सांसद रह चुके अली अशरफ फातमी के द्वारा मधुबनी से अपनी किस्मत आजमाये जाने की संभावना को बल मिलता दिख रहा है।विश्वस्त सूत्रों के हवाले से भी यही खबर निकल कर सामने आ रही है।वैसे फातमी ने जमीनी स्तर पर अपने चुनावी अभियान का आगाज भी कर दिया है।
  
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कुल मिलाकर 2019 के लोकसभा चुनाव में नीतीश मिश्रा और अली असरफ फातमी के आमने-सामने होने का आसार बनते दिख रहा है।वैसे तो यह एक अनुमान है पर उम्मीदवार जो भी हों, हुक्मदेव नारायण यादव के विरासत को बरकरार रखने के लिये एनडीए गठबंधन को ऐड़ी चोटी एक करनी होगी क्योंकि यहा एक फिर जोरदार मुकाबला होने की उम्मीद है।
 

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