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घर के अंदर घुस कर दहशतगर्द हमारी शहादत लेते रहे,यह भी हमें स्वीकार नही।

घर के अंदर घुस कर दहशतगर्द हमारी शहादत लेते रहे,यह भी हमें स्वीकार नही।

 

टाइम्स ऑफ मिथिला न्यूज़।जम्मू कश्मीर के पुलवामा में आतंकी हमले में हमारे जवानों की शहादत से पूरे देश में बेचैनी है।ये शहादत हमनें शरहद पर नही दिया है,घर वापसी के क्रम में हम आतंकी के शिकार बने है।देश की जनता इंसाफ की मांग कर रही है।सरकार सेना को खुली छूट देने की बात कर रही है।यह ठीक है कि हमे बदला चाहिए और हम लेंगें। पर अगर इस घटना के पीछे से जो सूचनाएं निकल सामने आ रही है ,उस पर  गौर करे तो फिर हमारी ही सुरक्षा नीति की चूक सामने आ रही है। गौर करें।

 


चूक कहा पर ?

काफिले में जिन बसों में जवान शामिल थे, वे बुलेट प्रूफ नहीं थीं। ROP, रोड पर लगाए गए IED को साफ करता है। ROP के क्लीयरेंस के बाद ही मूवमेंट होता है।काफिले के मूवमेंट के वक्त सिविल व्हीकल्स का मूवमेंट जारी रहता है. इन्हें रोका नहीं जाता. यहां तक कि वे ओवरटेक कर सकते हैं, काफिले के गाड़ियों के बीच भी कई बार सिविल व्हीकल्स आ जाते हैं.इस केस में IED से भरा व्हीकल अपोजिट लेन में बाईं ओर चल रहा था। जैसे ही काफिला, आतंकी के पास पहुंचा, उसने विस्फोटक से भरे व्हीकल को उड़ा दिया। विस्फोट से बस नंबर 5 और 6 प्रभावित हुईं।


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8 फरवरी को इंटेलीजेंस ब्यूरो ने CRPF को एक लेटर लिखा था। इसमें एजेंसी से जवानों के वाहनों के मूवमेंट के पहले इलाके को अच्छी तरह से साफ करने को कहा गया था। IB ने दहशतगर्दों के द्वारा IED के इस्तेमाल की आशंका भी जताई थी पर होनी को कोई नही टाल सकता और पिछले कई बार की भांति इस बार भी हमे शहादत देनी पड़ गयी।अब धीरे धीरे बहुत सारी सूचनाएं सामने आ रही है।एक रिटॉयर्ड IGP वीपीएस पंवार ने द क्विंट मीडिया से कहा "एक काफिले में आमतौर पर 300-400 जवानों से ज्यादा नहीं होते।काफिले को लगने वाले दिनों को भी पहले तय कर लिया जाता है। 78 व्हीकल्स का इस तरह से मूवमेंट, आतंकवादियों को खुला न्योता था।मुझे लगता है इतने सारे जवानों को एक साथ ले जाने का फैसला सही नहीं था।"

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कहा तो यह भी जा रहा है कि गृह मंत्रालय से जवानों को एयर लिफ्ट कराने की मांग की गई थी,पर सहमति नही मिल सकी और हमने....सपूतों को वैसे ही शहीद हो जाने दिया। शहादत के बाद बड़े बड़े व्यवसायी आर्थिक सहयोग में सामने आ रहे है पर काश हमारे देश में ऐसा हो पाता कि इन पैसों से हम जम्मू कश्मीर समेत सभी जगहों पर तैनात जवानों के लिये अमेरिका जैसी चुस्त और दुरुस्त व्यवस्था तैयार कर पाते।जो चले गए उन्हें तो लौट कर अब वापस आना नही,पर इस तरह घर के अंदर घुस कर दहशतगर्द हमारी शहादत लेते रहे,यह भी हमें स्वीकार नही।

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