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तेजस लड़ाकू विमान को मिला फाइनल ऑपरेशनल क्लियरेंस, इस विमान को बनाने में मिथिला के इस सपूत का है अहम योगदान।

तेजस लड़ाकू विमान को मिला फाइनल ऑपरेशनल क्लियरेंस, इस विमान को बनाने में मिथिला के इस सपूत का है अहम योगदान।

 

टाइम्स ऑफ मिथिला न्यूज़।देश के पहले मेक इन इंडिया लड़ाकू विमान तेजस को ऐयरो इंडिया शो में फाइनल ऑपरेशनल क्लियरेंस मिल गया है।इसके साथ यह विमान अब भारतीय वायुसेना का हिस्सा बन गया है।पूरे देश के लिए यह गौरव की बात तो है ही, लेकिन मिथिला के लिए यह विशेष पल है।भारतीय वायुसेना के बेरा में तेजस के शामिल होने से देश की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूती मिली है।भारत में विकसित किए गए लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट 'तेजस' के निर्माण में मिथिलांचल का गढ़ दरभंगा के घनश्यामपुर प्रखंड स्थित बाउर गांव के निवासी श्री मानस बिहारी वर्मा जी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
 
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वर्मा जी देश के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम जी के साथ लंबे समय तक काम कर चुके हैं। मानस बिहारी वर्मा एक भारतीय वैमानिकी वैज्ञानिक है । 2018 में, उन्हें भारत के राष्ट्रपति द्वारा पद्म श्री सम्मान से सम्मानित किया गया था।उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा मधेपुर के जवाहर हाई स्कूल से पूरी की। बाद में, उन्होंने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान , पटना और कलकत्ता विश्वविद्यालय में अध्ययन किया ।उन्होंने 35 वर्षों तक वैमानिकी धारा में रक्षा अनुसंधान विकास संगठन (DRDO) में एक वैज्ञानिक के रूप में काम किया।
 
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सेवानिवृत्ति के बाद, वह अपने पैतृक गांव लौट आए और शुरू किए गए विकास भारत फाउंडेशन के माध्यम से सुपौल, मधुबनी और दरभंगा के क्षेत्रों में दलित बच्चों को विज्ञान और कंप्यूटर ज्ञान प्रदान करने में शामिल हुए। विज्ञान और कंप्यूटर प्रशिक्षकों की एक टीम वैज्ञानिक प्रयोगों का प्रदर्शन करने और कंप्यूटर सीखने के लिए स्कूलों का दौरा करती है। यह शिक्षण आईबीएम द्वारा समर्थित 'लैब इन बॉक्स' (एलआईबी) कार्यक्रम के माध्यम से किया जाता है।विमान के प्रोजेक्ट से उसकी वास्तविक डिजायनिंग तक जिस वैज्ञानिक दल ने काम किया ,उस दल का ये मुखिया थे।आज मै उनके घर गया था,वो तो वहा नहीं थे पर उनके खाली तपोभूमि सरीखे लग रहे घर का मैंने करीब से मुआयना किया और जो अनुभव किया वो सिर्फ गर्व था......पूरे मिथिला को श्री मानस बिहारी वर्मा जी पर फक्र है।



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